ब्रिटिश शासन काल से ही मानकी मुंडा स्वशासन व्यवस्था प्रणाली था।

ब्रिटिश शासन काल से ही मानकी मुंडा स्वशासन व्यवस्था प्रणाली था।

Manki Munda self-governance system was in place since the British rule.

इतिहास कहता है 'हो' का इतिहास गौरवशाली रहा है. तत्कालीन अंग्रेज अफिसरों ने लिखा है कि कोल्हान के लोगों को लड़ाई से नहीं जीता जा सकता। सहमति के रास्ते से ही कुछ हो सकता है। तभी तो विलकिंसन कानून के माध्यम से अंग्रेजों ने इनसे संधि की और उनकी स्वशासन प्रणाली को मान्यता दी गई। अपनी अस्मिता के लिए 'हो' लोगों ने संघर्ष किया।

ब्रिटिश शासन की शुरूआत सन् करीब 1831 से 32 तक प्रसिद्ध कोल क्रान्ति -कोल्हान एवं पोड़ाहाट में 'हो' जाति के ब्रिटिश समाज के सम्पर्क में ला दिया।

ब्रिटिश शासन काल में सम्पूर्ण कोल्हान प्रांत को लगभाग 26 पीड़ (इंलाका) बाँटा गया। सम्पूर्ण राज्य पुलिस विहीन राज्य था। किन्तु प्रशासनिक सुविधा के लिये मानकी मुण्डा एवं डाकुआ के अन्र्तगत रखा गया। प्रत्येक मानकी में इसे 33 गाँव, क्षेत्रफल 1210 से 34347 एकड़ तक आता है। गाँव का मुखिया "मुण्डा" कहलाता है और पीड़ का मुखिया "मानकी" कहलाता है। ब्रिटिश शासन काल में कोल्हान-पोड़ाहाट के आदिवासी जातियों में मुखिया का पद आम नागरिकों तथा बड़े अधिकारियों के बीच प्रतिनिधि की आवश्यकता को देखते हुए बनाया गया आज भी कोल्हान पोड़ाहाट क्षेत्र में 'हो' आदिवासी मानकी मुण्डा स्वशासन की जीवंत भूमि है।

सिंहभूम जिले के कोल्हान एवं पोड़ाहाट "हो" आदिवासी इलाका है। यहाँ आदिकालीन देशज मानकी-मुण्डा शासन व्यवस्था है।

ब्रिटिश सरकार कोल्हान एवं पोड़ाहाट में विशिष्ट परम्पराओं एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखकर थामस विलकिंसन ने डेढ़ सौ साल पहले प्रशासन की 'मानकी-मुण्डा' प्रणाली लागू की थी।

All India Adivasi Ho Samaj Council.

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