क्या है...? SC/ST अधिनियम 1989| फिर भी आदिवासियों के ऊपर अत्याचार क्यों बढ़ते जा रहा है ???

 


क्या है...?

एससी/एसटी अधिनियम 1989


एससी/एसटी अधिनियम 1989 उन समुदायों के प्रति एक महत्वपूर्ण कानून है, जो सदियों से भेदभाव और अत्याचार का सामना कर रहे हैं। यह अधिनियम उनके अधिकारों की रक्षा करने और समाज में समानता को बढ़ावा देने के लिए एक आवश्यक उपाय है। 

भारत में 800 से भी ज्यादा जातियां एससी एसटी के दायरे में आता है उनके ऊपर अत्याचार स्वतंत्रता पूर्व से दिखाई पड़ता है और इसी कारण से उन्हें हमारे संविधान द्वारा जाति आधारित आरक्षण भी सुनिश्चित किया गया है। 

यह अधिनियम गैर-अनुसूचित जातियों और गैर-अनुसूचित जनजातियों द्वारा अनुसूचित जातियों और जनजातियों के सदस्यों के खिलाफ किए गए अपराधों के निवारण के लिए बनाया गया था। यह एक विशेष कानून है, क्योंकि अन्य विधियों जैसे कि सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 और भारतीय दंड संहिता इस समस्या को रोकने में प्रभावी नहीं रही हैं।

इस अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन से सुनिश्चित किया जा सकता है कि SC/ST समुदाय के सदस्यों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाए।

भारत में अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के अधिकारों की रक्षा के लिए 1989 में एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम पारित किया गया। जिसको अंग्रेजी मे इसे Prevention of Atrocities के नाम से जाना जाता है।इसका मुख्य उद्देश्य उन जातियों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों को रोकना और उन्हें आर्थिक तथा सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। 


अधिनियम की धारा 3 में उल्लिखित कुछ महत्वपूर्ण अपराध इस प्रकार हैं:


1. जबरन सेवन : यदि कोई गैर-SC/ST व्यक्ति किसी SC/ST व्यक्ति को ऐसे पदार्थ खाने या पीने के लिए मजबूर करता है जिसे वे नहीं खा सकते या पी सकते।


2. शारीरिक अपमान : अनुसूचित जाति या जनजाति के व्यक्ति को जबरन नंगा करना या उनके कपड़े उतारने का प्रयास ना करना।


3. जमीन का जबरन हड़पना: किसी SC/ST व्यक्ति की संपत्ति को जबरन हड़पने का प्रयास ना करना।


4. मतदान में बाधा : यदि किसी SC/ST व्यक्ति को अपना मतदान देने से रोका जाता है।


सजा का प्रावधान

इन अपराधों के लिए अधिनियम में न्यूनतम 6 महीने की सजा का प्रावधान है, जो गंभीरता के आधार पर 5 साल तक बढ़ाई जा सकती है। 

"अखिल भारतीय आदिवासी हो समाज परिषद" 

AIAHS COUNCIL.

फिर भी आदिवासियों के ऊपर अत्याचार क्यों बढ़ते जा रहा है ???

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