"हो" समाज की वर्तमान स्थिति कैसी है ?



Part-1

---"हो" समाज की वर्तमान स्थिति कैसी है ? 
"हो" एक भारतीय स्वदेशी समुदाय है, जो मुख्य रूप से भारतीय राज्यों झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, असम और बिहार में रहता है। 

 सांस्कृतिक पहचान और भाषा संकट:

भाषा विलुप्त होने का खतरा, यद्यपि हो भाषा (ऑस्ट्रो-एशियाई परिवार से संबंधित) का स्थानीय स्तर पर प्रयोग किया जाता है, लेकिन बंगाली, हिंदी या ओड़िया के दबाव के कारण इसका अस्तित्व संकट में है। विरासत को संरक्षित करने का प्रयास कुछ संगठन हो लिपि (वारंग चिति) और लोकगीतों को संरक्षित करने के लिए काम कर रहे हैं।

सामाजिक-आर्थिक स्थिति: हो समाज का मुख्य व्यवसाय कृषि (चावल, मक्का) है, लेकिन भूमि क्षरण और जलवायु परिवर्तन ने उनकी आजीविका को खतरे में डाल दिया है।  गरीबी और कुपोषण सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कई हो परिवार **बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे)** के रूप में सूचीबद्ध हैं। बच्चों में कुपोषण की दर चिंताजनक है।  

 प्रवासी श्रमिक : आर्थिक तंगी के कारण युवा वर्ग अन्य राज्यों (गुजरात, पंजाब) में मजदूरी करने को मजबूर हो रहा है।

शिक्षा एवं विकास चुनौतियाँ: हाई स्कूल छोड़ने की दर, गरीबी, भाषा अवरोध (शिक्षा का माध्यम स्थानीय भाषा नहीं है) और स्कूल की दूरी मुख्य कारण हैं। सरकारी पहल एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय जैसी परियोजनाओं ने बच्चों के लिए उम्मीदें जगाई हैं, लेकिन कार्यान्वयन में कमी है।

हो समुदाय के कई लोग गरीबी और शिक्षा की कमी से पीड़ित हैं। सरकार और निजी पहल द्वारा कुछ विकास परियोजनाएं चलाए जाने के बावजूद, कई क्षेत्रों में अभी भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। झारखंड ,पश्चिम बंगाल और ओडिशा में कुछ युवा शिक्षित होकर आधुनिक व्यवसायों में शामिल हो रहे हैं, लेकिन उनकी संख्या अभी भी कम है।

भूमि और वन अधिकारों के लिए लड़ाई:

वन भूमि अतिक्रमण हो समुदाय की आजीविका प्रकृति पर निर्भर करती है, लेकिन वन कानूनों (जैसे **वन अधिकार अधिनियम, 2006**) के उचित कार्यान्वयन की कमी के कारण उनके भूमि अधिकार अनिश्चित हैं। औद्योगीकरण का दबाव हो जनजातियों को खनिज समृद्ध क्षेत्रों जैसे ओडिशा, झारखंड में  खनन परियोजनाओं के कारण भूमि बेदखली का सामना करना पड़ रहा है। भूमि की हानि, वनों की कटाई, औद्योगीकरण के प्रभाव और राज्य की नीतियों के कारण उनकी आजीविका को खतरा है। 

कुछ इलाकों में नक्सलवादी आंदोलन का भी प्रभाव है।

राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अधिकार: संवैधानिक अधिकार हो समुदाय **पांचवीं अनुसूची** क्षेत्र में रहता है, लेकिन स्थानीय स्वायत्तता (**पेसा एक्ट**) कमजोर है।  आंदोलन हो के नेतृत्व में भूमि और स्वायत्तता की मांग को लेकर **पत्थलगढ़ी आंदोलन** (झारखंड) जैसे विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं। राजनीतिक भागीदारी मैं हो समुदाय बहुत पीछे हैं।

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कुल मिलाकर, हो समाज, यद्यपि पारंपरिक मूल्यों से बंधा हुआ है, आधुनिकता और आर्थिक संकटों के दबावों का सामना करता है। उनकी संस्कृति और भाषा को संरक्षित करने के प्रयास चल रहे हैं, लेकिन कई चुनौतियां हैं।

                                             AIAHS COUNCIL.


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